मुसाफ़िर

वक़्त की हर मार मैंने अकेले ही झेली है, मेरी सुबह पे अब अपना नाम रखने वालो, मेरी तन्हा हर रातों में मुसाफ़िर तुम ही थे क्या, आज गुज़र कर लेते हो बड़े ईमान से हामी भर लेते हो, जब बिकने को हुई थी मेरी मुस्कान, तो उसे बचाने के व्यापारी तुम ही थे क्या, …

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आज़ाद परिंदे

तुम ख़ोज रहे हो जिसे, वो नहीं मिलेगा मुझ में, फिर भी हूँ तुम्हारे साथ, जब तक साँस है इस दिल में, हो कोई करिश्मा तो कह नही सकते, कि मिल जाये वो, जिससे ख़ोज रहे थे आप मुझ में, हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं हम आपके लिए हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं …

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