आज़ाद परिंदे

तुम ख़ोज रहे हो जिसे,
वो नहीं मिलेगा मुझ में,

फिर भी हूँ तुम्हारे साथ,
जब तक साँस है इस दिल में,

हो कोई करिश्मा तो कह नही सकते,
कि मिल जाये वो,
जिससे ख़ोज रहे थे आप मुझ में,

हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं हम आपके लिए
हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं हम आपके लिए

आपको भी जगह दी है वैसे हमने अपने दिल में,

पर कोई वादा नहीं है
ना ही कोई उम्मीद रखना हमसे,

जिंदगी के जख्म आज भी
क़ुदरते हैं हमें हर वक़्त,

अब इतनी हिम्मत नहीं की आपको अपना कहकर खो दूँ,
अब इतनी हिम्मत नहीं की आपको अपना कहकर खो दूँ,

मान जाओ, संभल जाओ ऐ हुज़ूर,
की ना आता है ये ख़याल अब दिल में,

चलो मान लिया की, बन जाएंगे हम आपके हमेशा,

चलो मान लिया की, बन जाएंगे हम आपके हमेशा,

पर ऐ दोस्त, बंध जाएंगे हम जंजीरो में,

क्या कैद करके आप हमारी
जिंदगी की खुशी चाहते हो,

अगर हाँ,

तो ले आना शगुन इस बात का
कि करना है कैद एक आज़ाद परिंदे को

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