poem

आज़ाद परिंदे

तुम ख़ोज रहे हो जिसे, वो नहीं मिलेगा मुझ में, फिर भी हूँ तुम्हारे साथ, जब तक साँस है इस दिल में, हो कोई करिश्मा तो कह नही सकते, कि मिल जाये वो, जिससे ख़ोज रहे थे आप मुझ में, हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं हम आपके लिए हम जानते हैं बहुत ख़ास हैं …

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